बाज का पुनर्जन्म(Rebirth of eagle)

जैसे – जैसे एक बाज की उम्र बढ़ती है ! तो हर एक बाज के जीवन मे बढ़ती  उम्र के साथ एक ऐसा मोड आता है ! जहा उसके सामने पहले  दो रास्ते सरल और तुरंत समाधान देने वाले होते है ! और वही एक तीसरा  रास्ता जो कि बहुत ही कठिन  और पीड़ा देने वाला होता है !और बाज इन तीनों मे से तीसरा रास्ता  चुनता  है ! जो कि बहुत ही पीड़ा देने वाला होता है और इसी जगह से बाज का पुनर्जन्म (Rebirth of eagle) चालू हो जाता है !

Rebirth of eagle

दोस्तो हमारे जीवन मे भी ऐसे बहुत  से मोड आते है जब हमे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है ! और ऐसी स्थिति मे कुछ लोग तो संघर्ष करते हुऐ अपने जीवन मे  सफलता की ओर निकल जाते है ! और कई लोग इन परेशानियों से हार मानकर अपने आप को ज़िंदगी के हवाले कर देते है !

फिर इसके बाद हमारा और हमारी ज़िंदगी का कोई वजूद नही रहता है ! ये दुनिया हमेशा उसिकों सलाम करती है जो लोग अपनी ज़िंदगी का कलाम खुद ही लिखते है ! केवल इंसान ही नहीं बल्कि इस कुदरत के हर एक प्राणी के साथ ऐसा होता है !

इसी बात को बहुत अच्छी तरह से समझने के लिए हमे एक बाज से प्रेरणा लेनी होगी !वो कैसे अपने जीवन मे संघर्ष करता है !और एक सफलतापूर्ण जीवन जीता है !

How does eagle struggle in her life

एक बाज लगभग 70 साल का जीवन जीता है ! परंतु अपने जीवन के 40 वे वर्ष मे आते – आते उसको अपनी जिंदगी  का एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है ! इस अवस्था मे बाज  के शरीर के तीनों अंग बेअसर होने लग जाते है |
  • उसके पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है, जिसके कारण बाज अपने शिकार पर पकड़ नहीं बना पाता है|
  • उसकी की चौच जो कि आगे  कि ओर नीचे मूड जाती है ! जिसके कारण बाज को  भोजन खाने और निगलने मे बहुत ज्यादा परेशानी होती है !
  • उसके पंख भारी हो जाते है ! और शरीर  से चिपक जाने के कारण उड़ान नहीं भर पाते है ! उसके  भारी पंख उसकी उड़ान सीमित कर देते है !

भोजन ढूँढना , भोजन पकड़ना और भोजन  खाना , बाज की ये तीनों महत्वपूर्ण प्रक्रियाए अपनी धार खोने लगती है |

ऐसी स्थिति मे बाज के पास केवल तीन ही रास्ते बचते है |

जीवन का संघर्ष (Eagle’s struggle)

  • वो अपना शरीर छोड़ दे !
  • वो अपनी प्रव्रति छोडकर ! गिद्द की तरह त्यागे हुऐ भोजन पर निर्भर हो जाये !
  • बाज अपने आप को फिर से स्थापित करे !

आकाश के साफ तौर से बादशाह के रूप मे जहां पहले दो रास्ते सरल और तुरंत समाधान देने वाले है! वही तीसरा रास्ता अत्यंत पीड़ादायी और लंबा होता है!लेकिन बाज इनमे से पीड़ा को  चुनता है !और अपने आप को फिर से स्थापित करता है !

यहा से शुरू होता है बाज का पुनर्जन्म(Rebirth of eagle)

बाज सबसे पहले एक उचे पहाड़ पर जाता है, और एकांत मे अपना घौसला बनाता है! और वहा से चालू करता है! अपने जीवन की पूरी प्रतिक्रिया | सबसे पहले बाज अपनी चौच को चट्टानों पर मार – मार कर तोड़  देता है ! अपनी चौच को तोड़ने से ज्यादा पीड़ादायक और कुछ भी नही होता है ! ऐक पक्षीराज  के लिये और अब वह इंतजार करता है अपनी नई चौच के फिर सेउग आने की ! उसके बाद वह अपने  पंजे भी  उसी प्रकार से तोड़ देता है | और इंतजार करता है ! अपने नये पंजे उग आने का ! और फिर अपनी नई चौच  ! और नये पंजे आ जाने पर एक – एक कर ! नोच – नोच  कर अपने पंखो को अपने शरीर से अलग करना चालू कर देता है ! और अब प्रतीक्षा करता है अपने पंखो के पुनः उग आने की !

compare of human life (Rebirth of eagle)

बाज लगभग 150 दिन की पीड़ा और इंतजार सहता है,! और  इस लम्बे संघर्ष  के बाद बाज को मिलती है ! वही भव्य और उचि उड़ान पहले जैसी इस पुनर्स्थापना के बाद वह 30 साल और जीता है ! ऊर्जा , सम्मान , और गरिमा के साथ |

ये तो आपने सुना ही होगा की भगवान भी उसी कि मदद करता है जो उसकी मदद करता है |और आपको इसकी मिसाल मिल गई होगी ! जैसे बाज संघर्ष करता है 150 दिन तक और  भगवान उसके  संघर्ष को खाली नही जाने देता है ! उसको एक  नया जीवन देता है ! कुदरत हमे सीखाने बैठी है , पंजे पकड़ के प्रतीक है , चौच सक्रियता  , और पंख कल्पना को स्थापित करते है ! ईच्छा हालातो पर काबू करतीं है ! सक्रियता अपने आप के अस्थित्व की गरिमा  को बनाए रखती है , और कल्पना जीवन मे कुछ नयापन बनाये रखती है ! अंत मे ईच्छा , सक्रियता , और कल्पना तीनों ही निर्भर पड़ने लगते  है !

हम मे भी 40 वर्ष तक  आते –  आते पूरा व्यक्तित्व ही ढीला पड़ने लग जाता  है ! हमारे आधे जीवन मे ही पूरा जीवन खत्म होने जैसा लगता है ! उत्साह , आकांक्षा , ऊर्जा , नीचे की ओर जाने लगती  है ! हमारे  पास भी कई  विकल्प होते है ! कुछ सरल और तुरंत , और कुछ  पीड़ादायी होते है ! हमे भी अपने जीवन की मजबूरी और लचीलेपन को त्यागकर इन सबके उपर बाज की तरह काबू दिखाना होगा |

बाज के पंजो की तरह हमे भी आलस्य पैदा करने वाली वक्र मानसिकता को त्यागकर ! ऊर्जा से भरी सक्रियता दिखानी होगी ! बाज की चौच की तरह हमे भी भूतकाल मे जकड़े अस्थित्व को त्यागकर कल्पना की आजाद उड़ाने  भरनी होगी |

Summary of Rebirth of eagle

बाज के पंखो की  तरह 150 दिन ना सही 1 महिना ही बिताया  जाये ! तो खुद  को दोबारा स्थापितकरने मे तो शरीर  मन से चिपका हुआ हैं ! इसे तोड़ने और नोचने मे तो पीड़ा होगी ही !लेकिन बाज  तब उड़ान भरने को तैयार होगा ! और  इस बार उड़ान  और भी  ऊची और अनुभवी  होगी ! व आनंद की ओर जयेगी ! और जीत हमारी ही होगी सफलता हमारे कदम जरूर चूमेगी |

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