Juvenile justice act जानिए क्या है किशोर न्याय अधिनियम

juvenile justice act जुवेनाइल एक्ट क्या है

जब कोई भी बच्चा कानून विरोधी काम करता है !या फिर समाज विरोधी काम करता है या देश विरोधी कोई काम करता है ! जिसे कानून की भासा में किशोर अपराध या बाल अपराध कहा जाता है ! इसे ही Juvenile justice act किशोर न्याय अधिनियम कहा जाता है !

कानून की नजर में बाल अपराधी या किशोर अपराधी उसे कहा जाता है ! जिसकी उम्र 8 वर्ष से अधिक हो लेकिन 16 वर्ष से कम हो ! अगर इस उम्र के बीच का कोई भी बालक समाज विरोधी या कानून विरोधी काम करता है ! तो उसे कोई सजा का प्रावधान नहीं है ! लेकिन उसे क़ानूनी कार्यवाही के लिए बाल न्यायलय के समक्ष उपस्थित किया जाता है

जानिए जुवेनाइल एक्ट कब बना ?

सन 1986 में भारत में बाल अधिनियम को हटाकर पहली बार जुवेनाइल एक्ट बना ! और यह फैशला किया गया था ! अगर भारत में कोई भी लड़का जिसकी उम्र 16 वर्ष से कम है ! और कोई भी लड़की जिसकी उम्र 18 वर्ष से कम है उसे बाल अपराधी श्रेणी में माना जायेगा

वैसे भारत के हर राज्य में बाल अपराधी की अधिकतम आयु सीमा अलग अलग है

आपको पता है जुवेनाइल एक्ट क्यों बना ?

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भारतीय कानून के अनुसार एक अपराधी को सजा तब तक नहीं दी जा सकती है ! की उसकी उम्र कम से कम 7 वर्ष है ! क्योकि उस अपराधी का भरन पोषण या सीधी भासा में कहे तो उसका संरक्षण किसी दुसरे के हाथ में होता है ! इस प्रकार का अधिनियम सन 2000 में संशोधित किया गया था !

यदि किसी अपराधी की उम्र भारत सरकार के दस्तावेज के अनुसार 18 वर्ष से कम पाई जाती है तो उसका मुकदमा अदालत में ना चलकर जुवेनाइल एक्ट बोर्ड में चलता है

जुवेनाइल एक्ट के अनुसार अपराधी को क्या सजा मिलती है ?

juvenile justice act के अनुसार 18 वर्ष के कम उम्र के अपराधी को जेल की सजा दी जा सकती है ! हालाकी उसे उम्र कैद और फांसी की सजा नहीं दी जा सकती

इस प्रकार के अपराधी को अधिकतम तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा जा सकता है लेकिन 16 वर्ष उम्र होने पर अधिकतम 3 साल जेल और 10000/रुपए तक जुर्माना लग सकता है

जानिए जुवेनाइल एक्ट में संसोधन Amendment in Juvenile Justice Act

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जुवेनाइल एक्ट में संसोधन की जरूत इस लिए पड़ी जब पहले कोई भी किशोर जिसकी उम्र 18 साल से कम है और वह कोई अपराध करता है तो उसको किसी भी प्रकार का दंड नही दिया जाता था जिसके चलते बाल अपराधियों की संख्या 54 फीसदी से बढकर 66 फीसदी तक पहुच गई

जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (जेजे एक्ट) में इस तरह का प्रावधान किया गया है। की बाल अपराधी का अपराध इतिहास रखने के बजाय उसे नस्ट कर दिया जाये ताकि ताकि उस अपराध का प्रभाव बच्चे के भविष्य पर ना पड़े

और उसकी पुराणी गलतिया उसकी सरकारी नोकरी में अडचन ना create करे

जुवेनाइल एक्ट में सोशल रिपोर्ट क्यों बनाई जाती है

जब किसी ना बालिग अपराधी के उपर अपराधिक मामला चल रहा होता है उस वक्त लीगल प्रोफेसर ऑफिसर बच्चे के परिवार की सोशल जाँच रिपोर्ट करता है

इस रिपोर्ट में विषेश तोर से बच्चे के परिवार समाज रिश्तेदार और पडोशी की रिपोर्ट के अनुसार अगर बाल अपराधी को जमानत दी जाती है तो उस माहोल में उसका जीवन बर्बाद ना हो जाये

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Final word

यहाँ हमने juvenile justice act के बारे में बताया ! अगर आपका इस act से लेकर कोई भी सुझाव या सिकायत है तो हमें आप comment box में बताये ! या इस juvenile justice act से लेकर और कोई जानकरी आप लेना चाहते है तो भी आप हमें तुरंत comment करे ! हमे आपका इंतजार रहेगा अधिक जानकारी के लिए आप www.mekhrajbairwa.com website को जरूर visit करे

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