Juvenile justice act 2015 30+Questions (and Answers)

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Juvenile justice act 2015 से रिलेटेड 30 से भी अधिक प्रश्न उत्तर

लोक सभा में कुछ संसधानो के बाद मई 2015 में juvenile justice act 2015 लागु किया गया जिसमे कुछ बदलाव किये गये है वो इस प्रकार है

juvenile justice act 2015 संसोधन अधिनियम के तहत नाबालिग अपराधी की उम्र 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष कर दी गई है !

इस बिल में अपराधी को जघन्य मामलो में 3 साल से लेकर 7 साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है ! जबकि कोई जघन्य अपराध नहीं है तो न्यूनतम 3 साल तक की जेल होना संभव है

आओ जाने 30 + प्रश्नों का जवाब जो हर इन्सान को समझना जरुरी है

वास्तव में किशोर न्याय अधिनियम क्या है ?

जब कोई भी बच्चा कानून-विरोधी काम करता है या समाज-विरोधी काम करता है या राष्ट्र-विरोधी काम करता है! जिसे कानून की नजर में किशोर अपराध या बाल अपराध कहा जाता है! इसे किशोर न्याय अधिनियम कहा जाता है!

कानून की नजर में उसे किशोर अपराधी कहा जाता है! जिनकी आयु 8 वर्ष से अधिक है लेकिन 16 वर्ष से कम है

कानून की नजर में कोन है जुवेनाइल ?

भारतीय कानून के अनुसार जुवेनाइल वह व्यक्ति है जिसकी उम्र 18 साल से कम है तथा इस नियम के तहत एक अपराधी को जब तक कोई सजा नहीं मिलती तब तक उसकी उम्र कम से कम 7 साल ना हो जाये

जब पहले जुवेनाइल जस्टिस कानून था तो फिर इस बिल को लाने की क्या जरूरत पड़ी ?

सरकार ने अगस्त 2014 में जुवेनाइल जस्टिस बिल लोकसभा में पेश किया। इसमें कहा गया कि वर्तमान जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2000 के क्रियान्वयन में कई समस्याएं थीं और इससे जुड़ी चीजें प्रक्रियागत देरी का सामना कर रही थीं।

इसके अलावा, सरकार ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ( NCRB ) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि नाबालिगों, विशेषकर नाबालिगों द्वारा 16-18 वर्ष की आयु में किए गए अपराधों में वृद्धि हुई है।

अपराधियों की संख्या 54 फीसदी से बढकर 66 फीसदी हो गई ! इसलिए इस बिल का प्रसताव जरुरी था

नये बिल में क्या संसोधन किया गया ?

वर्तमान में, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2000 निर्धारित करता है कि उन बच्चों से कैसे निपटें जो कानून को अपने हाथों में लेते हैं और जिन्हें देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता होती है। नया बिल जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2000 की जगह लेने वाला है, जो दोनों बच्चों से जुड़े मामलों की प्रक्रियाओं में बदलाव का आह्वान करता है।

इस बिल में, जो दो ऐसे निकायों पर दिया गया है, जो इन बच्चों से संबंधित मामलों को देखेंगे। ये दो निकाय हर जिले में स्थापित किए जाएंगे और ये हैं: किशोर न्याय बोर्ड ( J J B ) और बाल कल्याण समिति ( C W C )। इसके अलावा, कानून के तहत गोद लेने की प्रक्रियाओं और सजा के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी गई है।

कानून तोड़ने वाले जुवेनाइल को क्या सजा मिलती है ?

2000 के अधिनियम के अनुसार, यदि कोई बच्चा कानून तोड़ता है, चाहे वह किसी भी तरह का अपराध हो, तो उसे अधिकतम तीन साल तक बाल सुधार गृह में रखा जा सकता है। बच्चे को किसी भी परिस्थिति में तीन साल से अधिक की सजा नहीं दी जा सकती है, न ही उस पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है और उसे वयस्क जेल में भेजा जा सकता है।

18 साल से कम उम्र के अपराधियों के लिए प्रस्तावित बिल में भी यही बात कही गई है, लेकिन इसमें एक बदलाव हुआ है। इस विधेयक के अनुसार, 16-18 आयु वर्ग के किशोर, जो जघन्य अपराध करते हैं, उन पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

इस बिल को पारित करने के बाद स्थाई समिति ने क्या महसूस किता ?

मानव संसाधन विकास संबंधी स्थायी समिति ने विधेयक की जांच करते हुए कहा कि एनसीआरबी के आंकड़े भ्रामक हैं क्योंकि वे प्राथमिकी पर आधारित हैं न कि आरोपियों की सजा पर। समिति ने यह भी पाया कि विधेयक कुछ संवैधानिक प्रावधानों का भी उल्लंघन करता है ! और कहा कि बाल अपराधियों के प्रति दृष्टिकोण सुधारात्मक और पुनर्वास केंद्रित होना चाहिए !

अगर कोई बच्चा अनाथ है तो फिर क्या होगा ?

यह बिल बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के लिए है! यदि कोई बच्चा अनाथ हो जाता है या उसे छोड़ दिया जाता है, तो उसे 24 घंटे के भीतर बाल कल्याण समिति के समक्ष लाया जाता है।

इसके बाद, बच्चे के लिए एक सामाजिक जांच रिपोर्ट तैयार की जाती है ! फिर समिति तय करती है कि बच्चे को बाल संरक्षण गृह में रखा जाए या उसे गोद लिया जाए या कोई अन्य उपाय किया जाए जो बच्चे के लिए सही हो !

बच्चो के खिलाप अपराध की सजा का क्या प्रावधान है ?

इस बिल में बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए कई सजाओं का उल्लेख किया गया है! इसमें बच्चों को नशीले पदार्थ देने बच्चों को खरीदने और बेचने बच्चों के खिलाफ क्रूरता आदि से संबंधित दंड शामिल हैं !

एक बच्चे को नशा देने पर सात साल की कैद और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है ! साथ ही यह भी कहा गया है ! कि बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़ी सजा में पांच साल की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना है!

यह देखना बाकी है ! कि कानून तोड़ने वाले नाबालिगों से जुड़े मुद्दों से निपटने में यह विधेयक किस हद तक सफल है।

वास्तव में juvenile justice act 2015 हर राज्य अलग अलग कानून है ?

बिल्कुल सही है

juvenile justice act 2015 का नियम व् कानून भारत के हर राज्य में अलग अलग है ! जो की राज्य सरकार के दुवारा बनाये गए है

क्या इसका मतलब यह है ! कि आघात, नशीली दवाओं की समस्या और मानसिक विकार जैसी चीजें किशोर न्याय में उतनी महत्वपूर्ण नहीं हैं !जितनी कुछ लोग सोचते हैं ! ?

नहीं, यह नहीं है, लेकिन इसका मतलब है ! कि अपराध में कमी के लिए उनका महत्व इस बात पर निर्भर करता है ! कि किस जनसंख्या पर विचार किया जा रहा है !

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जानिए पूरी जानकारी क्या है किशोर न्याय अधिनियम juvenile justice act

यहाँ हमने juvenile justice act 2015 के बारे में बताया! अगर आपके पास इस अधिनियम के बारे में कोई सुझाव या शिकायत है, तो हमें कमेंट बॉक्स में बताएं ! या यदि आप इस juvenile justice act 2015 से अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं ! तो आप हमें तुरंत comment करे हम आपका इंतजार कर रहे होंगे ! अधिक जानकारी के लिए आपको वेबसाइट www.mekhrajbairwa.com पर जाना होगा

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